इजाजत

झुकाती है जो पलके, तू देखकर मुझे

ये शर्म है, या कोई अदा है तेरी ,

यूँ बार-बार देखना मेरा, पसंद है तुझको

या फिर कोई गुस्ताख, खता है मेरी,

सोचता हु कई दिन से,

की तुझसे बात कर लूँ

रूबरू हो पहली,

मुनासिब मुलाकात कर लूँ

कुछ तेरी सुनु, और

कुछ अपनी बयां कर लूँ

जो तू इजाजत दे अपनी

तो आँखे तुझसे, मै चार कर लूँ,

और फिर भूल जाऊं खुद को

के इस कदर तुझसे प्यार कर लूं

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