पुरानी पहचान

पुरानी पहचान

तेरी आँखों की

कुछ तो बात होती है

मेरी आँखों से,

जिससे मै भी

बेखबर हूँ, और

तू भी अनजान है,

गर तू अजनबी है,

और कुछ भी नहीं है

तेर मेरे दरमियाँ,

फिर ऐसा क्यों लगता है,

जैसे तुझसे कोई,

बहुत पुरानी पहचान है

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