मै गाँव से हूँ

मै गाँव से हूँ |

कुहरे की सुबह, दोपहर की भीनी धुप, मंद बहती हवा और दिसंबर की ठंडी शाम से हूँ। घास पर ओस की बुँदे, हरे-भरे गेहूं के खेत, कच्ची सड़क, मिटटी की खुसबू, और आम के पेड़ की छाँव से हूँ । आरती से दिन का आरम्भ, प्रभु के भजनों से संध्या, लाउड स्पीकर में गूंजते, कृष्ण और राम के नाम से हूँ। चिडियों की चहक, फूलों की महक, साफ नीला आसमान, और चमकते तारों की रात से हूँ। मुझे गर्व है ” मै गाँव से हूँ “।

हरे-भरे गेहूं के खेत,

कच्ची सड़क, मिटटी की खुसबू,

और आम के पेड़ की छाँव से हूँ ।

आरती से दिन का आरम्भ,

प्रभु के भजनों से संध्या,

लाउड स्पीकर में गूंजते,

कृष्ण और राम के नाम से हूँ।

चिडियों की चहक,

फूलों की महक,

साफ नीला आसमान,

और चमकते तारों की रात से हूँ।

मुझे गर्व है ” मै गाँव से हूँ “।

Leave a Reply