सूखे पड़े है समंदर इश्क के

सूखे पड़े है समंदर इश्क के

सूखे पड़े है समंदर इश्क के

बंजर ये दिल की ज़मीन हो गयी है,

हाल बुरा है, आँखों का रो रो कर ,

पलकें भी ये ग़मगीन हो गयी है

ढूंढते है कदम भी मेरे,

निशाँ क़दमों के तेरे

अब कैसे समझाऊ इन्हें,

के साथ हम चले थे जिन रास्तो पर

पत्थर, अब वो जमीन हो गयी है,

तेरा जो कुछ सामान था मेरे पास

वो जला दिया एक दिन, गुस्से में मैंने,

मन मेरा लगा था तेरे बिना जिससे

अब वो तस्वीर भी तेरी कही खो गयी है|

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