बलिदान |

ये प्रसंग कुछ इस प्रकार है
के बलिदान कहानी का आधार है
जो समझ सके, तो धन्य हो
अन्यथा, इस जीवन पर धिक्कार है,

तो सुनो ध्यान से, और गौर करो
चिंतन करो, ना शोर करो
जो देश से अपने प्रेम है, तो सुनो
नहीं तो जाओ, कुछ और करो,

इतिहास गवाह है जिनकी कुर्वानी का
सदा रहेगा ऋणी, ये देश उनकी जवानी का
खून जो न खोला, वो पानि है
पढ़के हर पन्ना, उनकी कहानी का |

त्याग दिया जीवन का हर सुख
और आजीवन बैरागी हो गए
तोड़ कर सारे मोह और बंधन
वो वीर, हुकूमत से बागी हो गए,

लक्ष्य बनाकर आज़ादी को
जीवन पथ पर अग्रसर रहे
यातनाये भी सही अनेको
पर इरादे उनके अटल रहे

जीवन का अपने, समर्पण कर दिया
सब कुछ देश को, अर्पण कर दिया
पहन लिया चोला बसंती,
और मौत को दुल्हन कर दिया |

ये कटाक्ष है उन महात्माओ पर जिनको दुनिया संत कहती है
देकर उपाधि चाचा और बापू की घनी प्रसंशा निरन्त कहती है
क्यों ना पढ़ाया पाठ, अहिंसा का अंग्रेजो को
क्यों ना सिखाया भाव , दया का अंग्रजो को
क्यों उस अमानवीय प्रसंग को सम्मति दे दी
क्यों उन वीरों की फांसी को सहमती दे दी,

कुछ बुद्धि जीवो ने उनको आतंकी कहा
और कुछ ने पागल, सनकी कहा
कुछ कहते थे बचकाना उनको
और कुछ ने, विद्रोही बागी कहा,

तो हाँ सच ही है के पागल थे वो
और कोई सयंत एसा करता है क्या
हाँ आज़ादी के लिए जुनुजी थे वो
वर्ना तेइस की उम्र में कोई फंसी चढ़ता है क्या ?

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